दूसरा अवसाद-अध्याय 24

शार्द-मार्ग ने उन्हें अगली परीक्षा तक पहुंचाया: एक विशाल खाई, जो चमकते हुए और तैरते हुए पत्थरों से भरी हुई थी। उनके पास मौजूद शार्द कंपन करने लगे, और वे उन्हें संकीर्ण कगारों की ओर खींचने लगे जो एक अस्थिर मार्ग बना रहे थे।
“यह जगह पिछले से ज्यादा जीवित लग रही है,” रिया ने कहा। पहले वाली परीक्षा में सुनी गई फुसफुसाहटें यहां गायब थीं, उनकी जगह एक अजीब सी गूंज थी, जो उनके हड्डियों तक गूंज रही थी।
जैसे ही वे कगारों से गुजरते गए, ज़मीन हिलने लगी और रास्ते के कुछ हिस्से गिरने लगे। किरन एक स्थिर प्लेटफार्म पर कूद पड़ा। “जल्दी करो! यह जगह हमें यहाँ नहीं चाहती!”
गूंज तेज हो गई, और खाई की गहराई से एक ऐसा प्राणी उभरा जैसा उन्होंने पहले कभी नहीं देखा था: एक विशाल, पत्थर से बना सांप, जिसके चमकते हुए आँखें थीं। उसका शरीर तेज़, क्रिस्टल जैसी कांटों से सजा था, जो प्रकाश से दमक रहे थे।
“यहां एक रक्षक है,” मीरा ने तनावपूर्ण स्वर में कहा।
सांप ने सिर लहराया, उनका मार्ग रोकते हुए। उसने तुरंत हमला नहीं किया, लेकिन उसकी चमकती आँखें उनमें से हर एक का परीक्षण कर रही थीं।
“हमें इसके साथ लड़ने का समय नहीं है!” किरन ने कहा, शार्द को उठाते हुए।
“रुको,” रिया ने हाथ बढ़ाया। उसने धीरे-धीरे कदम बढ़ाए, उसका शार्द और भी उज्जवल हो गया। “मुझे नहीं लगता कि यह लड़ने के लिए है। यह कुछ संरक्षित कर रहा है।”
सांप ने फुफकारते हुए, धीरे-धीरे सिर झुकाया और अपने सिर के नीचे एक चमकता हुआ वेदी दिखाया।
मीरा की आँखें चौड़ी हो गईं। “दूसरा टुकड़ा।”

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