“Khooni Saazish Ka Raaz”
पैसेज 1: उस रात की गर्मी
दिल्ली की ठंडी दिसंबर रातों में भी एक अजीब सी गर्मी होती है, ख़ासकर तब जब इंसान मौत और जिंदगी के बीच टंगा हो। मैं उसी दोराहे पर खड़ा था, जब अचानक अँधेरे में से एक लड़की मेरे सामने आई—लंबे खुले बाल, तेज़ आँखें, और हाथ में एक छोटा ब्लैक-कलर का गन। उसका नाम मुझे तब नहीं पता था, पर उसकी एंट्री इतनी धमाकेदार थी कि मैं भूल गया कि मैं किसके पीछे आया हूँ।
उसने मेरे कंधे पर हथेली रखते हुए धीमी पर धारदार आवाज़ में कहा, “अगर अपनी जान प्यारी है, तो इस तरफ चलो… नहीं तो गोली लगेगी और लोगों को लगेगा कि गलती आपकी थी।”
मैंने उसकी आँखों में झाँका—डर नहीं दिखा, बल्कि एक अजीब सा कॉन्फिडेंस, जैसे वो इस अँधेरी गली की मालकिन हो। मैं उसके पीछे बढ़ा, और तभी दूर कहीं से सायरन की आवाज़ आई। किसी की मौत या किसी का भागना… पता नहीं। पर मुझे इतना ज़रूर लग गया था कि आज की रात शांत नहीं रहने वाली।
मेरे मन में पहला सवाल यही उठा—ये लड़की कौन है और ये मुझे बचा क्यों रही है?
मुझे अंदाज़ा नहीं था कि वही लड़की इस केस का सबसे बड़ा तूफ़ान बनने वाली है।
पैसेज 2: मैं कौन था
मेरा नाम आरव मलिक है—एक फ्रीलांस इन्वेस्टिगेटर, एक ऐसा आदमी जो पुलिस के दाँत खट्टे कर दे और अपराधियों के दिल में भी डर डाल दे। मैं ना हीरो हूँ, ना विलेन; मैं सिर्फ़ पैसों और सच के बीच कहीं भटकता हूँ। लोग मुझे तब याद करते हैं जब उनका मामला इतना उलझ जाता है कि पुलिस भी हाथ खड़े कर देती है।
उस रात मैं एक ऐसे केस का पीछा कर रहा था जो बाहर से साधारण लगता था—एक अमीर बिज़नेसमेन की गुमशुदा पत्नी। मैंने कई मिसिंग पर्सन केस किए हैं, पर इस केस में मेरे पेट में अजीब सा खिंचाव था, जैसे कुछ गलत होने वाला है।
मैंने सोचा था कि मामला आसान होगा—थोड़ा पीछा, कुछ पूछताछ, और शायद पत्नी किसी प्रेमी के साथ भागी होगी। पर जैसे-जैसे मैं आगे बढ़ा, लगा कि कहानी कुछ और ही है।
और फिर अचानक उस लड़की की एंट्री ने मेरे पूरे मिशन को उलझा दिया।
कौन थी वो? क्यूँ चाहती थी कि मैं दूसरी दिशा में जाऊँ?
और सबसे डरावना सवाल—क्या मैं गलत दिशा में जा रहा था और सही रास्ता उसी लड़की के पीछे था?
मेरे अंदर का डिटेक्टिव जाग चुका था… और अब मैं पीछे नहीं मुड़ सकता था।
पैसेज 3: वह काम
तीन दिन पहले की बात है जब मेरा क्लाइंट—कुनाल भाटिया—मेरे ऑफिस में आया था। महँगे सूट में लिपटा, सिगार की महक से भरा हुआ, और चेहरे पर वो वाला बनावटी दुःख जो सिर्फ़ अमीर लोग अफोर्ड कर सकते हैं। उसने भारी आवाज़ में बताया कि उसकी पत्नी, रिया, दो दिन से लापता है।
उसने कहा, “मुझे डर है कि उसे किसी ने किडनैप कर लिया है। मैंने पुलिस को इन्फॉर्म किया है, पर वो लोग काम में ढीले हैं। मुझे आपकी एक्सपर्टीज़ चाहिए।”
मैंने उसे गौर से देखा—उसकी आँखें बेचैन थीं, पर मुझे उस बेचैनी में कुछ फर्जीपन लगा, जैसे वो कुछ छुपा रहा हो।
फिर भी, उसके द्वारा ऑफर की गई रकम इतनी भारी थी कि मैं इंकार करना चाहता भी तो शायद नहीं कर पाता।
मैंने केस ले लिया।
और यहीं मेरी सबसे बड़ी गलती हुई।
क्योंकि ये कोई मिसिंग वाइफ केस नहीं था…
ये एक ऐसी जालसाज़ी थी जिसमें दिल्ली का आधा अंडरवर्ल्ड शामिल था।
पर तब मुझे इसका अंदाज़ा नहीं था।
मैं सिर्फ़ एक ‘मामूली’ केस की उम्मीद में निकला था… और अब उसी रास्ते पर मौत मेरे बिल्कुल करीब खड़ी थी।
पैसेज 4: मायरा की एंट्री
अँधेरे में मुझे बचाने वाली उस लड़की का नाम था—मायरा।
उसने जब पहली बार अपना नाम बताया, उसके चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कराहट थी, जैसे वो जानती हो कि मेरा दिमाग अभी कितने सवालों से भरा है।
वो मुझे एक खाली पार्किंग में ले गई, जहाँ दूर स्ट्रीट लाइट की हल्की रोशनी हमारे चेहरों पर गिर रही थी।
उसने गन अपनी जैकेट में रखी और मेरी तरफ मुड़कर बोली,
“तुम्हें लगता है कि तुम एक मिसिंग केस सॉल्व कर रहे हो, पर असल में तुम अपने क्लाइंट के झूठ को सुलझा रहे हो।”
मैंने भौंहें टेढ़ी कीं। “मतलब?”
वो पास आई, इतना कि उसके बाल मेरी गर्दन को छू गए।
“मतलब ये कि तुम्हारा क्लाइंट, कुनाल भाटिया, सच्चाई से उतना ही दूर है जितना तुम उससे करीब आने की कोशिश कर रहे हो। अगर तुमने इसकी गहराई में उतरना शुरू कर दिया तो… तुम जिंदा नहीं बचोगे।”
उसकी आवाज़ में न डर था, न चेतावनी… बस एक कड़वी सच्चाई थी।
मैं उसके चेहरे को पढ़ने की कोशिश करता रहा—ये लड़की कौन है? कैसे जानती है इतना?
मगर उसके अगले वाक्य ने मेरे पैरों तले जमीन खींच ली—
“रिया भाटिया—तुम्हारे क्लाइंट की पत्नी—वो सिर्फ़ missing नहीं… उसे छुपाया गया है।”
पैसेज 5: खून की बू
हम एक पुराने, बदबूदार वेयरहाउस में पहुँचे। दरवाज़ा आधा टूटा हुआ था और अंदर का माहौल इतना चुप था कि अपनी सांस भी डराने लगे। अंधेरा घना था, पर दीवारों से आती नमी की गंध में खून की हल्की बू मिली हुई थी—वही बू जो सिर्फ़ किसी ताज़ी मौत के बाद महसूस होती है।
मायरा आगे बढ़ी। उसकी चाल आत्मविश्वासी थी, जैसे वो इस जगह को अच्छी तरह जानती हो।
मैंने टॉर्च ऑन की और बीम को जमीन पर फेरा…
एक जगह रोशनी टिकते ही मेरा दिल जोर से धड़क उठा।
वहाँ एक आदमी की लाश पड़ी थी—चेहरे पर डर, गले पर गहरी काट, और कपड़ों पर सूखा हुआ खून।
“ये कौन है?” मैंने पूछा।
मायरा ने फौरन जवाब नहीं दिया। वो झुककर लाश को ध्यान से देखने लगी।
कुछ सेकंड बाद वो बोली,
“ये भाटिया का आदमी है… उसका सबसे भरोसेमंद गुर्गा।”
मेरी साँस अटक गई।
अगर भाटिया का आदमी मरा पड़ा है…
तो रिया की गायब होने की कहानी कहीं ज्यादा खतरनाक है।
मायरा ने मेरी ओर देखा और धीमे से कहा,
“जो भी ये खेल खेल रहा है, वो हर सबूत को मिटा रहा है। अगर हम देर कर गए… तो अगली लाश हमारी होगी।”
उस वक्त मुझे पहली बार महसूस हुआ—
ये केस मेरी सोच से ज्यादा अंधेरा है।
पैसेज 6: फोन कॉल
वेयरहाउस से बाहर निकलते ही मेरी जेब में पड़ा फोन जोर से वाइब्रेट हुआ। मैंने स्क्रीन पर नजर डाली—कुनाल भाटिया।
मैं हैरान था। उसे कैसे पता चला कि मैं कहाँ हूँ?
मैंने कॉल रिसीव की।
उसकी आवाज़ कांप रही थी, जैसे वो घबराया हो।
“आरव, तुम जहाँ हो वहाँ से तुरंत निकल जाओ। प्लीज़। तुम नहीं जानते तुम किससे उलझ चुके हो।”
मैंने पूछा, “तुम्हारे आदमी की लाश मिली है। तुम्हें पता था?”
कुछ सेकंड चुप्पी रही।
फिर वो बोला, “बस… मेरी बात मानो और उस लड़की से दूरी रखो।”
मैंने मायरा की तरफ देखा—वो दूर खड़ी हुई मुझे ही देख रही थी, जैसे उसे अंदाज़ा था कि फोन पर क्या बात हो रही है।
“भाटिया,” मैं बोला, “तुम कुछ छुपा रहे हो। और मैं उसे ढूँढकर ही रहूँगा।”
उसने फौरन कहा, “आरव, ये बहादुरी नहीं—मूर्खता है! तुम्हें खत्म कर दिया जाएगा!”
कॉल कट हो गई।
कुछ नहीं समझ आया—वो मुझे बचाने की कोशिश कर रहा था या धमका रहा था?
मायरा पास आई और बोली,
“उसकी बातों पर भरोसा मत करना। जो भी हो रहा है… वो उसी की वजह से शुरू हुआ है।”
मैं उलझ चुका था—कौन सही है? कौन झूठ बोल रहा है?
पैसेज 7: मायरा का अतीत
मायरा मुझे शहर के एक सुनसान मकान में ले आई। अंदर घुसते ही उसने दरवाज़ा बंद किया और कुंडी लगा दी। मैंने महसूस किया कि वो सिर्फ़ किसी केस में शामिल नहीं है—वो खुद इस कहानी का आधा हिस्सा है।
वो खिड़की की तरफ गई, बाहर झाँका, फिर गहरी सांस लेकर बोली,
“तुम्हें सच्चाई जाननी चाहिए, वरना तुम गलत फैसले लेते रहोगे।”
मैंने कहा, “फिर बताओ… तुम कौन हो असल में?”
वो धीमी आवाज़ में बोली,
“रिया भाटिया—वो सिर्फ़ तुम्हारे क्लाइंट की पत्नी नहीं… वो मेरी बड़ी बहन है।”
मैं कुछ पल उसे घूरता रह गया।
“क्या? मतलब तुम…”
“हाँ,” वो बोली, “और वो missing नहीं… उसे जानबूझकर गायब किया गया है। भाटिया उससे दीवानगी की हद तक obsessed था। उसकी लाइफ पर पूरा कंट्रोल रखता था।”
उसने अपनी मुट्ठी भींची।
“रिया उसके खिलाफ कुछ बड़े लोगों के साथ मिलकर सच उजागर करना चाहती थी। और उसी रात से सब खत्म हो गया।”
मुझे अब समझ आया कि मायरा इतनी गहरी क्यों जुड़ी हुई है।
ये सिर्फ़ एक केस नहीं…
ये उसके परिवार की लड़ाई थी।
और अब मैं भी इसमें फँस चुका था—बिना पीछे लौटने का रास्ता बचे।
पैसेज 8: खतरनाक खिंचाव
मायरा के साथ हर मिनट, माहौल और ज्यादा अजीब होता जा रहा था। वो बेहद मजबूत, बेहद स्मार्ट, और उतनी ही रहस्यमयी थी। पर उसके भीतर का दर्द भी किसी तेज़ चाकू की तरह साफ नज़र आ रहा था।
मैंने खुद को कई बार याद दिलाया—ये एक केस है, कोई रोमांटिक कहानी नहीं। पर पता नहीं क्यों, उसके आस-पास आते ही दिल और दिमाग के बीच एक लड़ाई सी शुरू हो जाती थी।
वो कमरे में इधर-उधर घूम रही थी, अपनी बहन की तस्वीरें, कुछ पुराने मैसेज, और कुछ डॉक्युमेंट्स टेबल पर रखकर मुझे दिखा रही थी।
पर मेरे दिमाग में उसके शब्दों से ज्यादा उसकी मौजूदगी घूम रही थी।
वो अचानक मेरे करीब आई और बोली,
“आरव, मैं जानती हूँ कि तुम्हें लग रहा होगा कि मैं तुम्हें manipulate कर रही हूँ… पर यकीन मानो, मुझे सिर्फ़ अपनी बहन को ढूँढना है।”
उसकी आँखें नम थीं, पर आवाज़ दृढ़।
मैंने उसकी तरफ देखा और कहा,
“मैं तुम्हारा यकीन करने लगा हूँ… लेकिन इस खेल में attraction बहुत खतरनाक होता है।”
वो हल्का सा मुस्कुराई,
“कभी-कभी खतरनाक चीजें ही इंसान को सही जगह तक पहुँचाती हैं।”
मुझे लगा—ये केस जितना करीब आ रहा है, खतरा उतना ही गहरा हो रहा है… और शायद हमारा रिश्ता भी।
पैसेज 9: गैंग वॉर का पहला संकेत
हम दोनों मायरा के बताए एक नए लोकेशन की तरफ जा रहे थे। सड़कें सुनसान थीं, और हवा में एक अजीब सा सन्नाटा था। मैं कार चला रहा था, और मायरा खिड़की से बाहर देख रही थी—जैसे उसे किसी भी पल किसी हमले की उम्मीद हो।
अचानक उसने चिल्लाया, “आरव, स्पीड बढ़ाओ!”
मैंने झट से एक्सिलरेटर दबाया, पर उससे पहले ही दो बाइक्स हमारी कार के पास आ गईं। दोनों पर बैठे लोगों ने चेहरे ढंके हुए थे और हाथों में कटा था।
एक बाइक वाला चिल्लाया, “गाड़ी साइड करो, वरना उड़ा देंगे!”
मैंने तुरंत स्टेयरिंग घुमाया और कार को दाएँ ले गया।
उसी वक्त धड़-धड़ दो गोलियाँ कार की विंडशील्ड से टकराई।
मायरा सीट पकड़ते हुए बोली, “ये भाटिया के आदमी नहीं हैं… ये किसी और गैंग के हैं!”
मेरे दिमाग में खतरे की घंटियाँ बज उठीं।
अगर दूसरा गैंग भी इस केस में शामिल है, तो रिया सिर्फ़ घर से भागी हुई पत्नी नहीं… कोई बहुत बड़ा राज रखती थी।
मैंने कार मोड़ी और पूरी ताकत से उन्हें झटका देकर पीछा छुड़ाया।
कुछ देर बाद जब रास्ता साफ हुआ, मायरा ने गहरी सांस ली और बोली,
“ये अब सिर्फ़ मिसिंग केस नहीं रहा। ये गैंग वॉर में बदल चुका है।”
और मैं समझ गया—मेरे सामने अभी असली लड़ाई शुरू हुई है।
पैसेज 10: सेफ हाउस
लगातार पीछा और गोलीबारी के बाद हम आखिरकार शहर के पुराने हिस्से में मौजूद एक बेहद शांत और जर्जर apartment reach हुए। मायरा ने उसे सेफ हाउस कहा। मैंने चारों तरफ नजर दौड़ाई—कमरे में पुरानी लकड़ी की अलमारी, टूटा पड़ा सोफ़ा, और कोने में एक मंद पीली लाइट। माहौल ऐसा था जैसे यहाँ जिंदगी कई साल पहले ही खत्म हो चुकी हो।
मायरा ने दरवाज़ा बंद करके दो बार चेक किया।
“यहाँ कोई हमें ट्रेस नहीं कर पाएगा,” उसने कहा।
मैं थक चुका था, पर दिमाग अब भी चला जा रहा था।
मैंने पूछा, “तुम्हें इतना सब कैसे पता?”
वो चुप रही। कुछ पल बाद बोली,
“क्योंकि मैंने कई सालों से इस अंडरवर्ल्ड को समझा है। रिया को बचाने के लिए मुझे इनके बीच घुसना पड़ा… और शायद मैं बहुत अंदर तक चली गई।”
उसके शब्दों में पछतावा था।
मैंने मेज पर रखे नक्शे और फाइलें देखीं—रिया की तस्वीरें, कुछ सीसीटीवी फुटेज, और कुछ नाम जो सीधे दिल्ली के बड़े राजनीतिक चेहरों से जुड़े थे।
मायरा मेरे सामने बैठी और धीमे से बोली,
“आज रात आराम करो। कल से सब असली शुरू होगा।”
मुझे समझ आ गया—वो सच में डरी हुई नहीं थी, बल्कि टूटी हुई थी।
और अब… मैं इस लड़ाई का हिस्सा बन चुका था।
पैसेज 11 – दोहरी चाल
उस रात मैं और मायरा ऑफिस से ऐसे निकले जैसे कोई थका हुआ जोड़ा हो—ना जल्दी, ना घबराहट। ये act हमने जानबूझकर खेला था, ताकि जो भी हमें shadow कर रहा है, उसे लगे कि हम case से bored होकर घर जा रहे हैं।
लेकिन अंदर ही अंदर हमारी चाल बिल्कुल उलटी थी।
हमने दो directions लीं—मैं सीधा main road की ओर गया, और मायरा एक auto में बैठकर पुराने शहर की तरफ निकल गई। Plan था simple: उन्हें confuse करना, ताकि वो किसी एक target पर focus न कर सकें।
मैंने अपनी bike उठाई और helmet पहनते हुए कुछ देर mirror में खुद को देखा—थका नहीं था, बस लड़ाई के mood में आ चुका था। मेरी instincts साफ कह रही थीं कि यह case सिर्फ़ किसी missing लड़की का नहीं… बल्कि किसी बड़े criminal operation का gate है।
Bike स्टार्ट की और दिल्ली की ठंडी हवा चेहरे से टकराई।
मैंने फोन silent किया और mind sharp—आज रात जानकारी जुटानी थी, लड़ाई नहीं।
एक ही सवाल दिमाग में घूम रहा था—
रिया किस सच्चाई के इतने करीब पहुँच गई थी कि उसे गायब कर दिया गया?
और उससे बड़ा सवाल—
कौन था जो हर कदम पर हमें invisible तरीके से रोक रहा था?
पैसेज 12 – मायरा का एकांत
मायरा अपने auto से सीधे उस जगह गई जहाँ उसकी और रिया की childhood की यादें थीं—जुनीझील नाम का एक छोटा-सा पार्क। रात में वहां कोई नहीं आता, इसलिए वो वहीं रुकी।
Auto वाले ने पूछा, “मैडम, यहाँ कोई नहीं रहता अभी।”
मायरा ने मुस्कुराकर कहा, “इसीलिए तो आई हूँ।”
पार्क में बैठते ही उसकी आँखों में वो softness आ गई जो वो आमतौर पर छुपाती रहती थी।
उसने अपने बैग से रिया की एक पुरानी फोटो निकाली—दोनों बहनें हँस रही थीं, बाल बिखरे हुए, आँखों में बेफिक्र चमक।
“Where are you, Rhea…” वो फुसफुसाई।
धीरे-धीरे उसका गुस्सा, दर्द और डर—सब आँखों से बहने लगा।
पर वो टूटने के लिए नहीं रो रही थी, खुद को मजबूत करने के लिए रो रही थी।
आसपास सन्नाटा था, बस दूर कहीं से रात की हवा पेड़ों में सरसराती आती थी।
तभी उसके फोन पर एक message आया—
Unknown: आपके पास जो chain है… वो अकेला clue नहीं है। Factory वापस आइए। Alone.
मायरा की सांस अटक गई।
उसने सोचा—signal trap भी हो सकता है… पर शायद clue भी।
उसने फौरन जवाब में सिर्फ़ एक word लिखा—
“कौन?”
कुछ नहीं आया। Silence।
लेकिन वो जानती थी कि उसे जाना पड़ेगा… चाहे डर कितना भी क्यों न हो।
पैसेज 13 – अंडरवर्ल्ड का लिंक
मैं एक पुरानी garage में पहुँचा—दिल्ली का वो कोना जहाँ police कदम नहीं रखती, और जहाँ की हवा में crime की हल्की गंध हमेशा रहती है।
वहाँ मेरा एक पुराना source था—गुड्डू।
चालाक, छिछोरा, लेकिन information का बादशाह।
मैंने पूछा, “Factory No. 51 के बारे में क्या जानते हो?”
गुड्डू ने पहले इधर-उधर देखा, फिर धीरे से बोला,
“वो जगह खाली दिखती है, पर असल में वहाँ late-night deals होती हैं… बड़ा माल आता है वहाँ, बड़ा माल जाता है।”
मैंने पूछा, “किसका माल?”
गुड्डू ने भौंहें उठाईं,
“Arav bhai… कभी-कभी ज्यादा पूछना जानलेवा होता है। पर एक नाम सुना है—साहिल अंसारी। शहर का उभरता हुआ underworld player।”
मैंने गौर से पूछा, “साहिल का रिश्ता रिया से?”
गुड्डू ने shrug किया,
“रिया? वो जो तीन हफ्ते से missing है? सुना है भैया… वो किसी बड़े scam की जानकारी leak करने वाली थी। और ये city कोई भी ऐसी लड़की को ज्यादा दिन जिंदा नहीं छोड़ती।”
मेरे भीतर कुछ पल के लिए खामोशी छा गई।
अगर रिया सच में किसी nexus की पोल खोलने वाली थी,
तो ये सिर्फ़ kidnapping नहीं—
एक planned silencing ऑपरेशन था।
पैसेज 14 – मायरा का खतरा
दूसरी तरफ, मायरा factory की तरफ जा रही थी। पूरा रास्ता अजीब सा चुप था। दिल कह रहा था कि ये trap है, पर दिमाग भी कह रहा था कि कभी-कभी risk लेना पड़े।
Factory का gate खुला था—शायद किसी ने जानबूझकर छोड़ा था।
अंदर वही बदबू, वही अंधेरा।
इस बार उसने अपनी छोटी flashlight निकाली और धीरे-धीरे आगे बढ़ी।
अचानक उसे किसी कदमों की आहट सुनाई दी।
उसके दिल की धड़कन तेज हो गई।
“कौन है?” उसने आवाज़ लगाई।
कोई जवाब नहीं।
वो आगे बढ़ी और एक कोने में जमीन पर एक सफेद कागज़ देखा।
उस पर लिखा था—
“अगर बहन को सच में बचाना है, तो अपने साथी (आरव) पर भरोसा मत करो।”
मायरा के पैरों तले जमीन खिसक गई।
ये किसने लिखा?
और क्यों?
तभी उसके पीछे कोई हल्की-सी हरकत हुई—
जब वह पलटी, तो एक हाथ उसके मुँह पर आ लगा और किसी ने उसे जोर से पीछे की ओर खींच लिया।
पैसेज 15 – फोन की खामोशी
मैं garage से बाहर निकल ही रहा था कि फोन vibrate हुआ—मायरा का call।
मैंने उठाया,
“हाँ मायरा, कहाँ हो तुम?”
पर उधर से सिर्फ़ हल्की साँसों की आवाज़ आई।
और फिर call कट गया।
मैंने दोबारा call किया—“The number you are trying is switched off.”
मेरे हाथ ठंडे पड़ गए।
मैंने तुरंत bike स्टार्ट की और उसी factory की तरफ निकल पड़ा, जहाँ हमें last clue मिला था।
रास्ते में मेरा दिमाग तेज़ी से चल रहा था—
कहीं मायरा ने अकेले जाने की मूर्खता तो नहीं की?
और वो message—“Come alone”—निश्चित रूप से trap था।
मैंने bike की speed लगभग double कर दी। आसमान में बादल गरज रहे थे, सड़कें गीली हो चुकी थीं, और मेरी heartbeat किसी hammer की तरह चल रही थी।
अगर मायरा को कुछ हो गया तो?
नहीं, उस thought को मैंने तुरंत दिमाग से हटा दिया।
मैं factory पहुँचा—
gate खुला था।
अंदर सन्नाटा।
मैंने जोर से आवाज लगाई,
“मायरा! MYRA!”
कोई जवाब नहीं।
बस दूर कहीं से एक हल्की-सी चीख गूँजी—
इतनी हल्की कि शायद कोई और सुन ही न सके।
लेकिन मैंने सुन ली।
पैसेज 16 – टकराव
मैं flashlight लेकर अंदर भागा।
खून का हल्का धब्बा… और जमीन पर मायरा का गिरा हुआ phone।
मेरे अंदर कुछ टूट सा गया।
तभी पीछे से आवाज़ आई—
“गलत जगह ढूंढ रहे हो, मिस्टर मलिक।”
मैं पलटा।
एक आदमी खड़ा था—काली hoodie, वही नीले shoes, चेहरा mask से ढका।
शायद वही जो पिछली बार factory से भागा था।
मैंने बिना देर किए उस पर हमला किया।
हम दोनों floor पर गिर पड़े।
उसने मुझे जोर का punch मारा, मैंने उसका mask पकड़कर almost उतार दिया।
उसने पैरों से जोरदार kick मारी और मेरी पकड़ छुड़ाकर भागने लगा।
मैं उसके पीछे दौड़ा।
Factory के पीछे का रास्ता कीचड़ से भरा था।
वह दीवार कूदकर बाहर जाने वाला था कि मैंने उसकी hoodie पकड़ ली।
वह पलटा और knife से मेरे हाथ पर वार किया।
मेरी हथेली से खून बह निकला।
वह बोला,
“यू आर नॉट सपोज़्ड टू बी हेयर। मायरा अब तुम्हारी पहुँच में नहीं है।”
इसके पहले कि मैं reaction दूँ, उसने पास खड़ी एक bike पर छलांग लगाई और अंधेरे में गायब हो गया।
मेरे पास बस एक ही thought बचा था—
मैं उसे छोड़ूँगा नहीं। और मायरा… मैं तुम्हें ढूँढकर लाऊँगा, वादा है।
पैसेज 17 – फिर ACP की एंट्री
मैंने तुरंत ACP राघव को call किया।
वो पाँच मिनट में अपनी टीम के साथ पहुँच गया।
“तुम फिर इस जगह पर?” उसने ताना मारा।
मैंने घूरकर कहा, “मायरा missing है। उसे उठा लिया गया है।”
उसने factory चेक करवाई, पर अंदर कुछ खास नहीं मिला—सिर्फ़ वही कागज़ का note और खून की थोड़ी मात्रा।
राघव बोला,
“ये देखने से लगता है कि उसे जिंदा ले जाया गया है… good news है। अगर मारना होता तो यहीं—”
मैंने उसे रोक दिया,
“बस details दो। मुझे पता करना है कि उसे कहाँ ले जाया गया।”
वो बोला, “अरे Sherlock, ये Delhi है। किसी को पकड़ना इतना आसान नहीं। पर एक बात बताता हूँ—factory की पास वाली सड़क पर एक CCTV है।”
हम footage देखने गए।
एक dark SUV तेजी से निकलती दिखी—और पीछे का दरवाज़ा थोड़ा खुला हुआ था, जैसे किसी को अंदर धकेला गया हो।
मैंने पूछा,
“Number trace कर सकते हो?”
राघव ने सिर हिलाते हुए कहा,
“Plate cloned है। Professional काम है।”
मैंने teeth भींचते हुए कहा,
“मतलब जिस network के पीछे हम थे, उसी ने उसे उठा लिया।”
राघव बोला,
“और इसका मतलब है कि मायरा को बचाना… रिया को ढूँढने से भी कठिन होगा।”
पैसेज 18 – नई उम्मीद
मैंने रातभर सोचा—कौन ले गया मायरा को? क्यों?
सिर्फ़ डराने के लिए या किसी बड़े plan के लिए?
सुबह होते ही मेरा दिमाग एक clue पर अटक गया—रिया का cyber complaint।
शायद वहाँ IP logs में कोई ऐसा trace हो, जिससे connection किसी आदमी, किसी gang, किसी organization तक जाए।
मैं cyber cell पहुँचा।
वहाँ की officer—नैना—मेरी पुरानी पहचान थी।
वो बोली, “क्या चाहिए इस बार?”
“रिया भाटिया का anonymous complaint लॉग,” मैंने कहा।
उसने file निकाली, computer खोला और बोली,
“देखो… report उसके laptop से भेजी गई थी। लेकिन IP masked था।
पर—”
मैंने पूछा, “पर क्या?”
“IP masking में एक glitch रह गया था—एक सेकंड का। उस एक सेकंड में जो location ping हुई थी, वो थी… Paharganj।”
मेरा दिल धक्का खा गया।
Paharganj — Delhi का सबसे shady इलाका, drugs, illegal hotels, और हर तरह की dark activity का केंद्र।
मैंने नैना से कहा,
“अगर मैं दो घंटे में वापस call न करूँ, तो समझ लेना कि मैं किसी गड्ढे में हूँ।”
वो मुस्कुराई, “तुम हर बार यही कहते हो, और हर बार जिंदा लौट आते हो।”
मैं मन ही मन सोच रहा था—
इस बार शायद इतना आसान नहीं होगा।
पैसेज 19 – पहाड़गंज का जाल
मैं पहाड़गंज पहुँचा।
सड़कों पर विदेशी टूरिस्ट, local dealers, लड़के-लड़कियाँ, और shady hotel boards।
यहाँ हर इंसान किसी न किसी deal में लगा होता है।
मुझे रिया के IP की approximate location पता थी—एक तीन-मंज़िला पुरानी building, जिस पर faded board था:
“Hotel Nightwave”
ये जगह बाहर से तो होटल लगती थी, पर अंदर शायद कुछ और ही चलता था।
Lobby में smoke और alcohol की गंध मिली। Reception पर बैठे लड़के ने मुझसे पूछा,
“Room?”
मैंने कहा, “नहीं, तलाश।”
उसने भौंह उठाई, “क्या?”
मैंने उसे एक फोटो दिखाई—रिया की।
वो एक पल के लिए रुका, जैसे उसे पहचान गया हो।
फिर बोला, “नहीं देखा।”
साफ़ था—वो झूठ बोल रहा था।
और ऐसे झूठ मैं बहुत जल्दी पकड़ लेता हूँ।
मैंने मेज़ पर हाथ रखकर धीरे से कहा,
“देख भाई… दो option हैं। या तो सच बता दे, या फिर मुझे दिखावा करना पड़ेगा कि तू smart है।”
वो घबरा गया।
धीरे से बोला,
“एक लड़की आई थी… उसी जैसी। पर उसके साथ कुछ लोग थे—black SUV वाले।”
मेरा खून जम गया।
“और कहाँ ले गए?”
लड़का हिचकिचाया, फिर बोला,
“Basement में… वहाँ कुछ room हैं जो hotel records में नहीं आते।”
मैंने धीमे स्वर में कहा—
“Take me there.”
पैसेज 20 – Basement का डर
हम narrow hallway से होते हुए basement की ओर बढ़े।
हवा ठंडी थी, पर dampness से भरी।
नीचे पहुँचते ही एक metallic smell आई—खून और rust की मिली-जुली गंध।
लड़का धीरे से बोला, “Sir… मैं ज्यादा आगे नहीं जाऊँगा।”
मैंने कहा, “ठीक है। भागना मत, वरना पहले तुम जाओगे।”
Basement में 7 कमरे थे—सबके दरवाज़े मजबूत iron के।
एक कमरे के ताले पर fresh scratch marks थे।
मैंने torch निकाली और दरवाज़ा धक्का दिया—अंदर किसी को रस्सियों से बांधा गया था।
धुंधली रोशनी में दिखा—एक लड़की…
मगर वो मायरा नहीं थी।
उसने मुझे देखते ही हाँफकर कहा,
“Please… please मुझे यहाँ से निकालो। मैं रिया की दोस्त हूँ। उसे ले गए हैं… मारे भी सकते हैं… मुझे नहीं पता कहाँ—”
मैंने उसे रस्सियों से मुक्त किया और पूछा,
“मायरा? उसकी बहन?”
वो कांपते हुए बोली,
“उसे भी same लोगों ने उठाया है। साहिल अंसारी… वो खुद उसे interrogate करने वाला था।”
साहिल अंसारी।
ये नाम दूसरी बार जोर से सामने आया था।
यानी अब खेल clear था—
रिया kidnapped थी क्योंकि वो सच जानती थी।
मायरा kidnapped हुई क्योंकि वो रिया को ढूँढ रही थी।
और अब—
मैं अगले नंबर पर था।
मैंने लड़की से कहा,
“चलो। अब हमें दोनों को बचाना है।”
और यहीं से कहानी एक नए, ज्यादा dangerous मोड़ में दाख़िल हो गई।
पैसेज 21 – भागना और बचना
मैंने basement से उस लड़की—नैना (रिया की दोस्त)—को बाहर निकाला।
Hotel के बाहर अंधेरा घना था, बारिश शुरू हो चुकी थी, और गली में बस दो street lights टिमटिमा रही थीं।
नैना काँप रही थी, उसकी साँसें तेज़ थीं।
मैंने पूछा, “तुम्हें कितने लोग यहाँ लाए?”
“तीन,” उसने जवाब दिया। “काले कपड़ों में, mask पहने हुए… उनमें से एक को सब ‘भाई’ कह रहे थे।”
भाई?
क्या वो साहिल अंसारी था? या उसके गंग का कोई बड़ा आदमी?
हम main road की तरफ भागते हुए निकले ही थे कि पीछे से किसी bike की तेज़ गर्जना सुनाई दी।
मैं पलटा—दो bike riders हमारी तरफ बढ़ रहे थे।
“Run!” मैंने चिल्लाया।
नैना और मैं अलग-अलग दिशाओं में दौड़े।
गोलियों की आवाज़ तेज़ी से हवा को चीरती हुई निकल रही थी।
मैंने एक कार के पीछे छिपकर अपनी gun निकाली।
Bike वाले करीब आए, मैंने एक पर निशाना साधा और गोली चलाई—वो लड़खड़ाकर गिर पड़ा।
दूसरा मेरे पीछे आया, पर उससे पहले ही सड़क पर पुलिस जीप की siren गूँज उठी।
वो पलटा और अंधेरे में गायब हो गया।
ACP राघव बाहर आया,
“फिर मुसीबत में मिले। इस बार किसके पीछे पड़े हो?”
मैंने भारी साँस लेते हुए कहा,
“उनके… जो मायरा और रिया दोनों को ले गए हैं।”
राघव का चेहरा instantly गंभीर हो गया।
पैसेज 22 – सुराग जो खून में लिखा था
हम police jeep में बैठे थे।
मैंने राघव को पूरा मामला बताया—hotel, basement, नैना, trapped rooms, और साहिल अंसारी का hint।
राघव गहरी सोच में डूब गया।
“साहिल अंसारी dangerous आदमी है, आरव। ये सिर्फ़ local gang नहीं… ये international network से जुड़ा है। Drugs, arms smuggling, data blackmailing—सब उसमें चलता है।”
मैंने पूछा, “रिया और मायरा उसके पास क्यों?”
“क्योंकि रिया ने उसके network के digital accounts में घुसने की कोशिश की थी।”
राघव ने file खोलते हुए कहा,
“उस anonymous complaint के पीछे पूरा cyber fraud था—multi-crore scam। रिया ने शायद सही nerve पकड़ ली थी।”
मैंने खिड़की से बाहर देखते हुए कहा,
“और इसलिए… उसने रिया को उठवा लिया।”
राघव बोला,
“और मायरा को leverage के लिए।”
मैंने teeth भींचते हुए कहा,
“वो leverage बहुत गलत आदमी पर इस्तेमाल कर रहे हैं।”
तभी नैना का phone vibrate हुआ—unknown message:
“तुम दोनों जिस सच्चाई की तरफ बढ़ रहे हो… उसके अंत में सिर्फ़ मौत है।”
राघव ने फौरन message trace किया।
Location मिली—दक्षिणपुरी का पुराना गोदाम।
उसने कहा,
“लगता है साहिल खुद खेल का मज़ा ले रहा है। शायद वही मायरा को वहीं ले गया हो।”
मैंने तुरंत कहा,
“तो चलो। अभी।”
दिल साफ हो चुका था—
आज रात मैं किसी को नहीं छोड़ूँगा।
पैसेज 23 – गोदाम की दहलीज़
हम दिल्ली के दक्षिणपुरी इलाके में enter हुए।
यहाँ का माहौल अलग ही था—अंधेरी गलियाँ, शराब की गंध, और कोनों में बैठे shady लोग।
गोदाम दूर से ही दिखाई दे रहा था—जर्जर, टूटी खिड़कियाँ, और एक ही बल्ब जो टिमटिमा रहा था।
मैं jeep से उतरा।
राघव बोला,
“अकेले मत जाना। ये area खतरनाक है।”
मैंने cold tone में कहा,
“खतरनाक जगहों का ही तो आदमी हूँ।”
गोदाम का gate आधा खुला था।
अंदर pitch black darkness।
मैंने torch ऑन की और धीरे-धीरे अंदर बढ़ा।
अचानक दीवार के पास किसी का silhouette दिखा।
मैंने कहा,
“रुको! कौन है?”
पर उससे पहले ही एक आवाज़ गूँजी—
“Welcome, Arav Malik.”
रोशनी जली।
साहिल अंसारी मेरे सामने स्टेज पर खड़ा था—
20-25 लोग गन लिए हुए उसके आसपास खड़े थे।
वो बोला,
“तुम्हें लाने के लिए इतनी मेहनत ना करता… अगर तुम्हारे अंदर इतना टैलेंट न होता।”
मैंने teeth कसे,
“मायरा और रिया कहाँ हैं?”
साहिल मुस्कुराया—
“किसने कहा कि वो दोनों अब भी तुम्हारी दुनिया में हैं?”
मेरी रगों में खून ठंडा हो गया।
पैसेज 24 – मायरा का पहला glimpse
साहिल ने ताली बजाई।
दो आदमी एक लड़की को खींचकर लाए।
उसके चेहरे पर चोट के निशान थे, बाल बिखरे हुए…
“MYRA!”
मेरी आवाज़ टूट गई।
वो barely conscious थी। उसकी आँखें आधी बंद, होंठ सूखे।
मगर उसने मुझे देखते ही किस्मत की आखिरी ताकत जुटाकर फुसफुसाया—
“Arav… don’t… stop.”
मेरे भीतर volcano फट गया।
“तुम इसे छोड़ दो। This fight is between you and me.”
साहिल ने cold हँसी हँसी।
“गलत। लड़ाई मेरे network और उस सच्चाई के बीच है जिसे रिया दुनिया के सामने लाना चाहती थी।”
मैंने पूछा,
“रिया कहाँ है?”
साहिल ने उँगली से इशारा किया—
दूर corner में एक glass room था, अंदर कोई silhouette दिखाई दे रहा था।
“अंदर है,” साहिल बोला।
“लेकिन ये तुम पर depend करता है कि वो जिंदा रहेगी या नहीं।”
मैंने instantly गन उठाई।
लोगों ने भी हथियार तान लिए।
साहिल बोला,
“Calm down, hero. ये कोई Bollywood नहीं। यहाँ हर गोली की कीमत होती है।”
मैंने धीमे से कहा,
“तुम गलत आदमी से उलझ गए हो, साहिल।”
वो मुस्कुराया—
“और तुम गलत जाल में फँस चुके हो।”
पैसेज 25 – सौदा
साहिल ने हाथ के इशारे से सबको शांत किया।
वो नीचे उतरकर मेरे सामने आया।
“Deal करते हैं, Arav.”
मैं चौंक गया।
“Deal?”
वो बोला,
“हाँ। तुम smart हो, fast हो, और सबसे बड़ी बात— fearless हो। ऐसे आदमी की ज़रूरत हर network को होती है। Join me.”
मैंने हँसकर कहा,
“और तुम सोचते हो मैं तुम्हारे जैसे गंदे आदमी के लिए काम करूँगा?”
साहिल बोला,
“सोचो मत। Practical बनो। तुम्हारी जान भी बचेगी, तुम्हारी लड़की भी—और उसकी बहन भी।”
मैंने teeth भींचे,
“मायरा मेरी लड़की नहीं है।”
साहिल बोला,
“Not yet.”
मुझे उस पर गोली चलाने से खुद को रोकना पड़ा।
वो आगे झुककर बोला,
“मैं तुम्हें बताता हूँ—रिया ने जो डेटा चुराया था, उससे मेरा multi-million scam exposed हो सकता है। बस वो data दो… और मैं तीनों को छोड़ दूँगा।”
मैंने पूछा,
“और अगर मैं ना कहूँ?”
वो बोला,
“तो तुम तीनों को मौत मिलेगी… तीन अलग-अलग style में।”
मेरे दिमाग में thunderstorm चल रहा था।
दिल कह रहा था—“लड़ो।”
दिमाग कह रहा था—“जीतने के लिए दिमाग चाहिए।”
मैंने कहा,
“मुझे data देखने दो।”
साहिल मुस्कुराया—
“Good boy.”
पैसेज 26 – glass room का सच
मैं glass room की तरफ बढ़ा।
अंदर अंधेरा था।
मैंने torch जलाई…
और रिया जमीन पर पड़ी हुई थी।
वो जिंदा थी—लेकिन कमजोर।
उसके हाथ बंधे हुए थे, और उसके चेहरे पर घाव थे।
मैं झुककर उसके पास गया।
उसने मेरी हथेली पकड़ी और भारी साँस लेते हुए कहा,
“Arav… सब झूठ है… वो जो deal दे रहा है… सब धोखा है…”
मैंने पूछा,
“क्या?”
रिया ने कहा,
“डेटा उसके पास नहीं है। वो मुझे ढूँढते हुए खुद panic में है… उसे लगता है data मेरे पास है… पर…”
वो बोलते-बोलते खांसने लगी।
मैंने कहा,
“चुप। आराम से बोलो।”
“डेटा… उस जगह है… जहाँ कोई imagine भी नहीं कर सकता… मायरा जानती है…”
मैं stunned था।
“मायरा?”
रिया ने सिर हिलाया।
“वो… वो तुम पर trust करती है… उसे बचा लो… please…”
उसकी आवाज़ धीमी होती चली गई।
मैं गुस्से में भर चुका था।
साहिल ने न सिर्फ दो बहनों को निशाना बनाया, बल्कि सच्चाई को intentionally manipulate किया।
अब ये deal नहीं, personal war थी।
पैसेज 27 – दिमाग की लड़ाई
मैंने वापस साहिल के पास जाकर calm tone में कहा,
“ठीक है। मैं deal मानता हूँ—लेकिन मुझे data verify करना होगा।”
साहिल खुश हुआ।
“Good decision.”
उसने अपने आदमी को इशारा किया।
वो लोग मुझे laptop और एक encrypted pendrive लाकर दिए।
मैंने pendrive खोली।
एक file थी: “Network_Accounts_Encrypted”.
मैं मुस्कुराया।
“Fake है।”
साहिल चौंका।
“क्या?”
मैंने कहा,
“क्योंकि असली data होता तो रिया इसके लिए अपनी जान न देती।”
साहिल की आँखें लाल हो गईं।
“तुम underestimate कर रहे हो मुझे।”
मैं बोला,
“और तुम underestimate कर रहे हो इन दो बहनों की loyalty को।”
वो गुस्से में चिल्लाया,
“GUARDS!”
उसने आदेश दिया,
“इसे बाँध दो। पहले इसको मारेंगे, फिर बहनों को।”
मेरी गन दूर फेंक दी गई।
चार आदमी मुझे पकड़ने आए।
पर मैं तैयार था—
मैंने एक guard के घुटने पर kick मारी, दूसरे को elbow से मारा, तीसरे का weapon छीना और चौथे के सिर पर जोरदार वार किया।
गोदाम में chaos फैल गया।
मैंने साहिल की ओर देखा—
“Game शुरू हो चुका है।”
पैसेज 28 – मायरा की वापसी
गोलियों की आवाज़ गूँज रही थी।
मैंने cover लिया और लगातार दो guards को नीचे गिरा दिया।
साहिल भागकर पीछे के कमरे में चला गया—शायद किसी exit की तरफ।
तभी मैंने एक और आवाज़ सुनी—
एक लड़की की चीख।
मैं दौड़कर उस तरफ गया—
मायरा को दो आदमी खींचकर बाहर ले जाने की कोशिश कर रहे थे।
मैं गरजा,
“उसे छोड़ो!”
मैंने गोली चलाई—एक guard गिर पड़ा।
दूसरा भागने लगा, पर मैं उसके पीछे कूदा और उसे जमीन पर पटक दिया।
मैंने मायरा के हाथ खोले।
वो मुझे देखते ही मेरी तरफ झुक गई।
“Arav… I knew you’d come…”
उसकी आवाज़ कांप रही थी।
वो चोटिल थी, मगर ज़िंदा।
मैंने कहा,
“अब मैं किसी को तुम्हारे पास आने नहीं दूँगा।”
उसने मेरा हाथ पकड़ा।
“रिया… उसे बचाना है…”
मैं मुस्कुराया,
“दोनों को बचाऊँगा। Promise.”
मायरा ने गहरी साँस ली।
“Arav… पीछे…”
मैं पलटा—
एक guard मेरे ऊपर हमला करने आया था।
मैंने उसके हाथ से गन छीनी और उसे बेहोश कर दिया।
अब सिर्फ़ एक काम बचा था—
साहिल अंसारी को ढूँढना।
पैसेज 29 – दोनों बहनें सुरक्षित… लेकिन?
मैंने मायरा को जल्दी से उठाया और रिया के पास ले गया।
दोनों बहनें एक-दूसरे को देखकर रो पड़ीं।
रिया ने कमजोर आवाज़ में कहा,
“मायरा… I thought I would never see you again…”
मायरा ने उसे गले लगा लिया।
“तू जिंदा है… बस ये काफी है।”
मैंने उन्हें सहारा देकर खड़ा किया।
“हमें यहाँ से तुरंत निकलना होगा। साहिल भागने की कोशिश करेगा—और वो वापस जरूर आएगा।”
रिया बोली,
“नहीं। वो… वो भाग नहीं रहा… वो कुछ बड़ा plan कर रहा है।”
मैंने पूछा,
“कैसे पता?”
रिया ने कहा,
“उसने कहा था—अगर deal fail हो जाए तो पूरी building उड़ जाएगी। उसने कहीं bombs लगाए हैं।”
मेरी रूह कांप गई।
“मतलब ये पूरी जगह blasted हो सकती है?”
रिया ने सिर हिलाया।
“Any moment.”
मैंने तुरंत बहनों को बाहर की ओर ले जाना शुरू किया।
गोदाम का दरवाज़ा अब भी खुला था।
हम जैसे ही बाहर निकले—
एक जोरदार explosion हुआ।
पूरा गोदाम हिल गया।
मैं चिल्लाया,
“RUN… NOW!”
हम तीनों बाहर की ओर भागे।
पीछे आग तेजी से फैल रही थी।
पर मेरी नज़र सिर्फ़ एक चीज़ पर थी—
साहिल अब भी कहीं बाहर जिंदा था।
पैसेज 30 – साहिल की सबसे बड़ी चाल
हम बाहर निकल आए।
गोदाम के पीछे काली SUV खड़ी थी—शायद वही जिसमें मायरा को ले जाया गया था।
अचानक मेरे फोन पर call आया—Unknown Number।
मैंने उठाया।
साहिल की आवाज़ आई—
“Congratulations, Arav. तुमने दोनों बहनों को बचा लिया।”
मैंने teeth भींचते हुए कहा,
“तू कहाँ है? सामने आ!”
वो हँसा।
“सामने आकर खुद को मरवाने का शौक नहीं है।
लेकिन I admire you. तुम smart हो, dangerous हो… और predictable भी।”
मैंने पूछा,
“अब क्या चाहता है?”
साहिल बोला,
“तुम समझते हो कि आज मैंने हारा? नहीं, Arav.”
मैं चिल्लाया,
“तूने गोदाम उड़ाया—फिर भी क्या बचा तेरे पास?”
वो धीरे-धीरे बोला,
“Data.”
मेरी सांस रुक गई।
“रिया के पास data नहीं था। तो किसके पास है?”
साहिल ने धीरे से कहा—
“उसके पास… जो तुम्हारे सबसे करीब है।”
मेरी आँखें फटी रह गईं।
मैंने मायरा की तरफ देखा—
वो घबराकर मुझे देख रही थी।
साहिल बोला,
“हाँ, Arav… data Myra के पास है।
और उसे खुद भी नहीं पता।”
Call कट गया।
गोदाम की आग पीछे जल रही थी…
और सामने खड़ी थीं दो बहनें—जिनमें से एक के पास वो रहस्य था…
जिसके पीछे पूरा अंडरवर्ल्ड पड़ा था।
पैसेज 31 – सच का झटका
साहिल का “डेटा मायरा के पास है” वाला खुलासा मेरे दिमाग में हथौड़े की तरह बज रहा था।
मैंने मायरा की तरफ देखा।
वो पूरी तरह स्तब्ध थी—जैसे किसी ने उसकी हड्डियाँ तक जमा दी हों।
“Arav… मेरे पास क्या होगा? मैं तो सिर्फ़ रिया को बचाने आई थी।”
रिया ने भारी आवाज़ में कहा,
“नहीं दी… साहिल झूठ नहीं बोल रहा। वह हमेशा वही बोलता है जिससे सामने वाला डर जाए… या confuse हो जाए। इस बार उसने हमें सच में confuse कर दिया।”
मैंने calmly कहा,
“बैठो दोनों। हमें ये समझना होगा कि data किस तरह ‘मायरा’ तक पहुँचा।”
रिया ने आँखें बंद कीं,
“शायद… शायद वो night जब मैंने complaint file की थी… मैंने तुम्हारे घर आकर तुम्हारे laptop पर कुछ documents save किए थे… emergency में। शायद वही data किसी hidden folder में save हो गया हो…”
मायरा stunned थी।
“मतलब… मुझे खुद पता ही नहीं था कि मेरी device पर क्या है?”
मैंने सिर हिलाया,
“बिल्कुल। और यही वजह है कि साहिल तुम्हें leverage की तरह इस्तेमाल कर रहा है।”
मायरा की आँखों में डर उभरा,
“Arav… क्या मेरे पीछे और भी लोग आएंगे?”
मैंने उसका हाथ पकड़कर कहा,
“जब तक मैं ज़िंदा हूँ—कोई तुम्हें छू भी नहीं सकता।”
और पहली बार उसने मेरे shoulder पर सिर टिकाया।
पैसेज 32 – ACP की strategy
हम तीनों पुलिस स्टेशन पहुँचे।
राघव ने हमें देखते ही कहा,
“लगता है आप लोग blast से मज़े लेकर आ रहे हैं।”
मैंने उसे घूरा,
“साहिल escaped है। और उससे बड़ा twist—data मायरा के पास है।”
राघव का चेहरा instantly गंभीर हो गया।
वो बोला,
“मुझे लगता है साहिल अकेला नहीं है। वो किसी बड़े network का pawn है। अगर data सच में मायरा के पास है, तो half city उसे ढूँढने लगेगी।”
मैंने पूछा,
“Plan?”
राघव बोला,
“पहला step—मायरा को safe house में shift करना होगा।
दूसरा—रिया की medical care, वो काफी कमजोर है।
तीसरा—तुम और मैं data ढूँढेंगे और decode करेंगे।”
रिया बोली,
“मैं भी help करूँगी। वो data मैंने देखा था, आधा याद है… उसमें बहुत dangerous नाम थे—जिनमें दो ministers भी शामिल थे।”
राघव ने फौरन दरवाज़ा लॉक किया।
“अगर यह सच है, तो यह सिर्फ़ kidnapping या gang war का मुद्दा नहीं… यह national-level corruption का मामला है।”
मैंने table पर हाथ मारकर कहा,
“तो हमें जल्दी करनी होगी। साहिल data लेने के लिए कोई भी हद पार करेगा।”
राघव बोला,
“और उसके पीछे बहुत बड़े लोग हैं… जिन्हें तुमने अभी देखा भी नहीं।”
मुझे महसूस हुआ—
जहाँ हम खड़े थे, वहाँ से लड़ाई बस शुरू हुई थी।
पैसेज 33 – Safe House का डर
राघव के दो officers मायरा और रिया को लेकर safe house की तरफ गए।
मैं उनके साथ bike पर था। Safe house शहर के बाहरी इलाके में था—एक पुराना लेकिन secure farmhouse।
मायरा थोड़ा डर रही थी।
“Arav… हम यहाँ कुछ दिन रह पाएंगे?”
मैंने कहा,
“जब तक data नहीं मिलता, तुम्हें यहीं रहना होगा।”
रिया मुस्कुराई,
“अजीब है… मैं अपनी बहन को बचाने आई थी, और अब खुद उस पर ही case टिका है।”
हम safe house पहुँचे—चारों तरफ ऊँची दीवारें, CCTV cameras, और एक steel gate।
अंदर सबकुछ शांत था।
लेकिन मायरा ने फुटस्टेप का आवाज़ सुनकर कहा,
“नीचे कोई है?”
मैं तुरंत pistol निकालकर नीचे गया।
पर नीचे कोई नहीं था—बस हवा खिड़की से अंदर आ रही थी।
मैंने ऊपर लौटकर कहा,
“शायद तुम्हारा mind tense है।”
मायरा बोली,
“नहीं Arav… मुझे लगता है यहाँ कुछ अजीब है।”
तभी रिया ने खिड़की खोली और जोर से बोली,
“देखो—gate बाहर कोई खड़ा है!”
मैंने नीचे देखा—
एक आदमी दीवार के पास खड़ा होकर हमारे safe house की तरफ इशारे कर रहा था।
मैं गरजा,
“तुम दोनों अंदर रहो। मैं देखता हूँ कौन है।”
और मैं नीचे दौड़ पड़ा—
पैसेज 34 – Unknown Visitor
मैं बाहर पहुँचा तो वो आदमी भागने लगा।
मैंने आवाज लगाई,
“रुक! वरना गोली मार दूँगा!”
वो नहीं रुका।
मैंने chase शुरू किया—कच्ची सड़क, कीचड़, अँधेरा।
कुछ सेकंड बाद मैंने उसे पकड़ लिया और जमीन पर पटक दिया।
मैंने उसकी hoodie हटाई।
चेहरा देखकर मैं खुद stunned रह गया—
वो वही लड़का था जो Hotel Nightwave में reception पर बैठा था।
मैंने गुस्से में पूछा,
“तू यहाँ क्या कर रहा था? किसके कहने पर आया?”
वो काँपता हुआ बोला,
“साहिल के आदमी मुझे ढूँढ रहे हैं। अगर मैं तुम्हें warning न देता, वो मुझे मार देते। मैं बस बताने आया था… कि आज रात safe house पर हमला होने वाला है।”
मैंने उसका collar पकड़कर कहा,
“क्या बकवास है?”
वो रो पड़ा,
“साहिल को पता चल गया कि आपने basement से नैना को बचाया। अब वो सोच रहा है कि data तक पहुँच भी तुम लोगों के पास है। वो… वो 6-7 gunmen भेज रहा है… अभी कुछ ही घंटों में।”
मेरी रगों में खून खौलने लगा।
मैंने पूछा,
“और तूने हमें क्यों बताया?”
वो बोला,
“क्योंकि साहिल अपने लोगों को भी मार देता है। मैं… मैं next नंबर पर था।”
मैंने गहरी सांस ली और कहा,
“ठीक है। आज रात… हम हमला होने नहीं देंगे।”
मायरा और रिया danger में थीं—
और मैं किसी भी कीमत पर उन्हें नुकसान नहीं होने देता।
पैसेज 35 – तैयारी
मैं safe house लौटा और दरवाज़ा जोर से बंद किया।
मायरा ने तुरंत पूछा,
“कौन था? क्या कहा उसने?”
मैंने गंभीर लहजे में कहा,
“हमारे पास सिर्फ़ कुछ घंटे हैं। साहिल आज रात यहाँ हमला कराने वाला है।”
रिया के चेहरे पर खौफ उतर आया,
“हम फिर फ़ँस गए?”
मैंने कहा,
“नहीं। इस बार हम ready होंगे।”
मैं storage room में गया—वहाँ कुछ पुराने लेकिन काम करने लायक weapons थे।
Shotgun, two pistols, flare gun, smoke grenades।
मायरा बोली,
“क्या ये घर पहले किसी cop का था?”
मैंने कहा,
“नहीं… राघव का personal safe spot है।”
हम तीनों ने roles decide किए—
मैं front guard
मायरा side window cover
रिया upstairs surveillance
रिया की हालत कमजोर थी, पर उसकी आँखों में courage था।
“Arav… मुझे डर लग रहा है, पर मैं लड़ना चाहती हूँ।”
मायरा ने उसके हाथ पकड़े,
“हम साथ हैं।”
मैंने दोनों की तरफ देखा—
उनके चेहरे पर डर था, पर उससे ज्यादा उम्मीद।
और उस रात पहली बार मैंने महसूस किया—
ये दो बहनें सिर्फ़ एक केस नहीं…
मेरी responsibility बन चुकी थीं।
पैसेज 36 – हमला शुरू
शाम होते-होते मौसम बदल गया।
हवा तेज़, आसमान काला, दूर बिजली की कौंध।
करीब 9 बजे रिया ने ऊपर से चिल्लाया,
“Arav! Main gate के पास movement!”
मैंने binocular से देखा—
तीन कारें, दो bikes, करीब 8-10 हथियारबंद आदमी।
मायरा ने पूछा,
“साहिल आया?”
मैंने कहा,
“उसकी entry हमेशा अंत में होती है।”
हमने अपनी positions ले लीं।
मैं gate के पास crouch होकर बैठा।
पहला आदमी gate पर आया—
उसे अंदाज़ा नहीं था कि हम ready हैं।
मैंने चिल्लाया,
“अंदर आने की कोशिश की तो यहीं दफना दूँगा!”
पर वो पीछे नहीं हटा।
उसने गन उठाई—
और मैंने trigger दबाया।
गोली उसके कंधे में लगी और वो जमीन पर गिर पड़ा।
बाकी लोग चिल्लाए,
“MARDO! अंदर घुसो!”
गोलियों की बारिश शुरू हो गई।
safe house की दीवारें bullet proof थीं, इसलिए हम safe थे—
पर ज्यादा देर तक नहीं।
मायरा ने side window से दो attackers को गिरा दिया।
उसकी निशाना लगाने की skill देखकर मैं भी दंग रह गया।
“सीखा कहाँ से?” मैंने चिल्लाकर पूछा।
वो बोली,
“तुमसे मिलने से पहले जिंदगी आसान नहीं थी।”
मैं मुस्कुराया—
battlefield में भी उसने जवाब stylish दिया था।
पैसेज 37 – आग और बारूद
हमारा सामना अब 8 attackers से था।
मैंने grenade pin खींचकर बाहर फेंकी—
एक जोरदार blast हुआ।
“Arav!”
रिया की आवाज़ ऊपर से आई।
“Right side boundary पर दो आदमी दीवार फाँदकर अंदर आ रहे हैं!”
मैं उधर दौड़ा।
अँधेरे में दो shadows कूद रहे थे।
मैंने एक को kick मारी—वो नीचे गिरा।
दूसरे ने knife से मुझ पर हमला किया, पर मैंने उसकी कलाई मोड़कर उसे disarm कर दिया।
मायरा ने पीछे से backup दिया।
उसने attacker को बेहोश कर दिया।
उसने मुझे पकड़कर कहा,
“तुम ठीक तो हो?”
मैंने कहा,
“जब तुम साथ हो… कुछ नहीं होगा।”
उसकी आँखों में कुछ पल के लिए softness तैर गई।
पर युद्ध अभी चला हुआ था।
अचानक पीछे से तीखी गंध आई।
मैंने पलटकर देखा—
किसी ने house के पीछे petrol डालकर आग लगा दी थी।
“ये लोग घेराबंदी कर रहे हैं!” मायरा चिल्लाई।
रिया बोली,
“अगर आग फैल गई तो हम घर में फँस जाएंगे!”
मैंने कहा,
“नहीं। हमें बाहर निकलकर counter attack करना होगा।”
अब ये सिर्फ़ बचाव नहीं—
पूरी लड़ाई थी।
पैसेज 38 – साहिल का आगमन
अचानक गोलीबारी रुक गई।
अजीब सा सन्नाटा छा गया।
हवा में धुआँ, आग की हल्की रोशनी…
फिर एक गहरी आवाज़ गूँजी—
“Arav Malik!”
मैं instantly recognize कर गया—
साहिल।
वो main gate पर खड़ा था, हाथ में silenced pistol, पीछे 4 bodyguards।
वो बोला,
“बहुत नाटक हो गया। अब सीधा सौदा करते हैं।”
मैंने कहा,
“क्या चाहता है?”
वो ठंडी मुस्कान के साथ बोला,
“Data. अभी. इसी वक्त.”
मैंने कहा,
“और बदले में?”
साहिल ने मायरा की तरफ इशारा किया,
“उसकी जान।”
मेरी नसें तन गईं।
मैंने cold tone में कहा,
“मैं किसी को भी तेरे हाथ मरने नहीं दूँगा।”
साहिल हँसा,
“तो फिर लड़ो।”
उसने हाथ उठाया—
“Kill them all.”
और second wave शुरू हो गई।
गोलीबारी दोबारा शुरू।
धुआँ, आग, चीखें…
पर इस बार हम cornered थे।
मैंने मायरा को धक्का देकर cover के पीछे किया,
“रिया को बचाओ!”
मैं खुद open ground में कूदा और attackers पर फायरिंग शुरू की।
ये fight किसी फिल्म से कम नहीं थी—
लेकिन असली थी।
और outcome सिर्फ़ दो थे—
जीत या मौत।
पैसेज 39 – खून और कसम
मैंने तीन attackers को गिराया था।
मायरा ने एक को shoot किया।
रिया upstairs से guidance दे रही थी।
पर साहिल के पास अभी भी advantage था।
उसकी गन सीधे मेरी तरफ थी।
उसने कहा,
“Enough drama. अब खत्म करते हैं।”
वो trigger दबाने ही वाला था कि—
धांय!
गोली चली—
पर मुझे नहीं लगी।
साहिल चौंक गया।
मेरे पीछे से रिया उतरी थी,
और उसके हाथ में flare gun थी।
गोली सीधे साहिल के कंधे में लगी।
वो चीखा,
“YOU LITTLE—!!”
उसी पल मैंने उसकी pistol लात मारकर गिरा दी।
मैं उस पर टूट पड़ा—
हम जमीन पर गिर पड़े।
ये fight जान की नहीं… ego की थी।
उसका घूँसा मेरे चेहरे पर लगा।
मैंने उसके ribs पर वार किया।
उसने knife निकाला—
मैंने उसकी कलाई पकड़कर उसे पीछे मोड़ा।
वो थपथपाया,
“Enough… enough…”
पर मैंने उसकी collar पकड़ी और कहा—
“ये… दो बहनों के लिए है।”
और एक जोरदार punch उसके जबड़े पर जमाया।
वो बेहोश हो गया।
मायरा मेरे पास आई,
“Arav… तुम ठीक हो?”
मेरे होंठों से खून बह रहा था।
मैंने कहा,
“हाँ… बस थोड़ा जीत गया हूँ।”
उस पल… हमने लड़ाई जीत ली थी।
लेकिन जंग अभी बाकी थी।
पैसेज 40 – सबसे बड़ा सच
हम safe house के अंदर वापस आए।
साहिल बेहोश, उसके आदमी भाग चुके थे, पर खतरा खत्म नहीं हुआ था।
रिया ने मायरा को गले लगाया,
“दी, हम बच गए…”
मायरा रोते हुए बोली,
“मैंने सोचा था… तुम दोनों को खो दूँगी।”
मैंने दोनों को बैठाया।
“अब असली काम शुरू होता है।”
मायरा ने पूछा,
“कौन सा?”
मैंने कहा,
“Data decode करना।
रीया ने कहा था—असल data मायरा के पास है। यानी उसके laptop में।”
रिया बोली,
“वो encrypted है। बिना सही key के खुल नहीं सकता।”
मैंने laptop खोला।
और जैसे ही मायरा ने उसे on किया—
screen पर एक hidden folder pop हुआ—
“R-File”
मायरा चौंकी,
“ये कब आया?”
रिया बोली,
“यही वो data है… ministers, businessmen, criminals… पूरे scam का सच।”
मैंने file खोली—
name after name…
bank transfers…
foreign accounts…
murders…
drug deals…
ये data explode हो सकता था।
पूरे शहर की foundation हिल सकती थी।
रिया बोली,
“अब तुम समझ रहे हो… क्यों हमें मारना चाहते थे?”
मैंने गहरी सांस ली।
“अब ये guerra हम alone नहीं लड़ सकते। हमें सरकार तक पहुँचाना होगा।”
मायरा धीरे से बोली,
“और साहिल?”
मैंने कहा,
“वो तो बस pawn था। असली players अब सामने आएंगे।”
और इसी के साथ…
कहानी अपने सबसे बड़े climax की तरफ बढ़ने लगी।
पैसेज 41 – देशद्रोह का डेटा
हम तीनों safe house के dining table पर बैठे थे, laptop खुला था और screen पर scam की पूरी दुनिया नंगी पड़ी थी।
राघव भी पहुँच चुका था।
रिया ने एक-एक फाइल खोलकर बताया—
“ये सिर्फ़ drug smuggling नहीं… ये illegal arms का नेटवर्क है।
और ये देखो—इन transactions में दो cabinet ministers और तीन बड़े corporate नाम शामिल हैं।”
राघव का चेहरा पत्थर जैसा हो गया।
“ये मामला national security तक पहुंच सकता है। अगर ये leak हो गया, तो दिल्ली में political earthquake आ जाएगा।”
मैंने कहा,
“तो हमें data leak नहीं करना… पहले इसे सही जगह deliver करना है।”
रिया बोली,
“साहिल के पीछे जो लोग हैं… वो minister-level तक बैठे हुए हैं। उन्होंने मेरे computer hack कराए, phone track किया और मुझे उठवा लिया।”
मायरा ने गहरी सांस ली,
“Arav… इसका मतलब है कि वो लोग आज भी हमें ढूँढ रहे हैं। साहिल का पकड़ा जाना भी उन्हें रोक नहीं पाएगा।”
राघव बोला,
“अब ये मामला मेरे बस का नहीं… हमें direct intelligence wing तक जाना होगा।”
मैं slowly बोला,
“और वो हमें बगैर proof के नहीं मानेंगे।
मतलब data physically लेकर जाना पड़ेगा—risk के साथ।”
हमारी नज़रें एक-दूसरे से मिलीं।
जो आने वाला था, वो अब तक की सबसे बड़ी लड़ाई थी।
पैसेज 42 – दिल्ली की सबसे खतरनाक रात
हमने plan बनाया—
अगली सुबह data को गुप्त तरीके से intelligence HQ पहुँचाना था।
लेकिन रात को safe house का माहौल बेहद tense था।
हर आवाज़, हर हवा का झोंका suspicious लग रहा था।
रिया कमरे में laptop encrypt करने में लगी थी।
मायरा खिड़की के पास बैठी थी—थकी हुई, पर आँखों में फाइट।
मैं उसके पास गया।
“तुम ठीक हो?”
वो धीरे से बोली,
“Arav… अगर कल कुछ हो गया तो? अगर हम में से कोई…”
मैंने उसका हाथ पकड़ लिया।
“कुछ नहीं होगा। मैं होने नहीं दूँगा।”
वो हल्का मुस्कुराई,
“तुम बहुत overconfident रहते हो।”
मैंने कहा,
“नहीं… बस सच बोलता हूँ।”
थोड़ी देर की चुप्पी के बाद उसने पूछा,
“Arav… इस सब लड़ाई में तुम मेरे लिए क्यों इतने desperate हो?”
मैं उसके करीब झुककर बोला,
“क्योंकि… अब ये case नहीं रहा। ये personal है।”
उसने मेरी आँखों में देखा—कुछ पल के लिए दुनिया जैसे रुक गई।
तभी—
धांय!
safe house के बाहर गोली चली।
रिया चीखी,
“Arav! कोई दीवार के पास है!!”
मैं बाहर दौड़ा—
और देखा, gate के बाहर एक आदमी dead पड़ा था…
हाथ में phone, जिस पर लिखा था—
“They are coming.”
पैसेज 43 – Invisible Enemies
हमने उस dead आदमी की तलाशी ली—
जेब में सिर्फ़ एक sim, कोई ID नहीं।
राघव ने तुरंत कहा,
“ये insider था। साहिल के नेटवर्क से कोई।”
मैंने पूछा,
“उसने हमें warn क्यों किया?”
रिया ने अनुमान लगाया,
“क्योंकि वो भी डरता था।
इस network में loyalty नाम की चीज़ नहीं… सब अपनी जान बचाने के लिए कुछ भी कर सकते हैं।”
मायरा ने gate की तरफ देखा,
“अगर ये warn करने आया था… तो असली attackers बस कुछ दूर होंगे।”
तभी एक drone ऊपर से उड़ता हुआ गुजरा—
सीधे हमारे घर की तरफ।
मैं चिल्लाया,
“Inside! सब अंदर जाओ!”
हम तीनों अंदर भागे।
मैंने CCTV खोला—
road से तीन black SUVs आ रही थीं।
राघव बोला,
“ये intelligence से पहले हम तक पहुँच गए।
किसी ने हमारी movement leak की है।”
मायरा ने गुस्से से कहा,
“इसका मतलब data अब सिर्फ़ खतरा नहीं… ये मौत का invitation है।”
मैंने कहा,
“Act fast. Plan change।”
“क्या?” रिया ने पूछा।
मैंने कहा,
“हम safe house से पीछे के जंगल वाले रास्ते से निकलेंगे।
SUVs को deceive करेंगे… और सीधा HQ पहुँचेंगे।”
रिया बोली,
“और अगर वो पीछा करेंगे?”
मैं मुस्कुराया,
“तो उन्हें ऐसा पीछा दिया जाएगा जो ज़िंदगी भर याद रहेगा।”
पैसेज 44 – पलायन
हमने जल्दी-जल्दी सामान उठाया—
laptop, data drive, weapons।
Safe house के पीछे एक छोटा जंगल था, और जंगल के पार एक narrow road जो rarely used थी।
हम वहीं से निकलने वाले थे।
धीरे से gate खोला—
कोई नहीं।
हवा ठंडी, अंधेरा गहरा।
हम तीनों भागते हुए जंगल में गए।
पत्तों और मिट्टी की खुशबू के बीच हमारे footsteps गूँज रहे थे।
मायरा थोड़ा लड़खड़ाई—
मैंने उसे संभाला।
“रीना, speed बढ़ाओ… किसी भी पल—”
तभी पीछे से loud horn सुनाई दिया।
SUV lights jungle में घुस रही थीं।
रिया घबरा गई,
“उन्होंने हमें देख लिया है!”
मैंने कहा,
“Run straight! मत रुको!”
हम भागते रहे—
पेड़ों के बीच से रास्ता बनाते हुए।
मैंने एक पेड़ के पीछे छिपकर दो attackers को रोकने के लिए गोली चलाई।
एक गिरा, दूसरा छिप गया।
लेकिन SUVs पास आ चुकी थीं।
रीना बोली,
“Arav! आगे road दिख रही है!”
हम road पर पहुँचे—
और एक miracle हुआ।
ठीक उसी समय एक truck वहाँ से गुजर रहा था।
मैंने चिल्लाकर कहा,
“Truck में कूदो!”
और हम तीनों moving truck में कूद पड़े।
पैसेज 45 – भागते हुए सच
Truck के पीछे की तरफ हम ज़मीन पर गिरते-गिरते बचे।
ड्राइवर को शायद पता भी नहीं चला कि तीन लोग उसके पीछे चढ़ गए हैं।
मायरा हाँफती हुई बोली,
“अगर ये truck न मिलता, हम पकड़े जाते।”
रिया ने अपने laptop को कसकर पकड़ा,
“ये data किसी भी कीमत पर उनकी हाथों में नहीं जाना चाहिए।”
मैंने बाहर झाँका—
SUVs ने road पकड़ ली थी और truck का पीछा कर रही थीं।
मैंने जल्दी से कहा,
“हमें उनका पीछा रोकना होगा… नहीं तो हम HQ तक नहीं पहुँच पाएंगे।”
मायरा ने पूछा,
“कैसे?”
मैंने truck की railing पकड़ी और खुद को ऊपर खींचने लगा।
“मैं truck की roof पर चढ़ रहा हूँ।
वो SUVs को distract करूंगा।”
रिया घबरा गई,
“Arav! ये suicide है!”
मैंने मुस्कुराकर कहा,
“I prefer the word ‘heroic’.”
मायरा ने मेरा हाथ पकड़ लिया—
पहली बार, पूरी मजबूती से।
“Arav… please careful रहना।”
मैंने उसकी आँखों में देखकर कहा,
“मैं वापस आऊँगा। तुम्हारे लिए।”
फिर मैं truck की roof पर चढ़ गया—
हवा तेज़, नीचे दो SUVs।
मैंने अपनी gun निकाली और momentum में गोली चलाई—
एक SUV ने अचानक brake मारी और रोड से उतरकर ditch में गिर गई।
एक down।
एक बाकी।
पैसेज 46 – अंतिम पीछा
अब सिर्फ़ एक SUV truck के पीछे थी।
उसके ऊपर दो armed men खड़े होकर हम पर निशाना लगा रहे थे।
मैं roof पर crouch हो गया और aiming शुरू की।
Truck का balance shaky था, लेकिन adrenaline high।
मैंने गोली चलाई—
पहला attacker नीचे गिरा।
दूसरा संघर्ष कर रहा था—
उसने machine gun निकाली।
गोलीयों की लाइन truck के पीछे लगने लगी।
टिन की छत चिंगारियाँ छोड़ रही थी।
मैं चिल्लाया,
“रीना! मायरा! नीचे रहो!”
फिर मैंने मौका देखकर दूसरी गोली चलाई—
SUV का tyre burst हो गया।
SUV घूमा…
फिसला…
और पेड़ से टकराकर रुक गया।
मैंने राहत की सांस ली।
अब रास्ता साफ था।
Truck speed बढ़ाता जा रहा था।
हवा में victory की smell थी।
मैं नीचे उतरा—
मायरा ने मुझे जैसे ही देखा, उसकी आँखें चमक उठीं।
“तुम safe हो?”
मैंने कहा,
“तुम्हारे रहते कैसे नहीं होऊंगा।”
रिया बोली,
“अब बस HQ पहुँचाना है… data ही हमारी असली जीत है।”
लेकिन वो नहीं जानती थीं—
सबसे बड़ा twist अभी बाकी था।
Truck अचानक रुक गया।
ड्राइवर मुड़ा—
और मेरे दिल की धड़कन रुक गई।
ड्राइवर…
साहिल अंसारी था।
पैसेज 47 – ड्राइवर का रहस्य
साहिल के चेहरे पर खतरनाक मुस्कान थी।
“Surprised, Arav?”
मैंने pistol निकाली,
“तू तो blast में मर गया था।”
वो हँसा,
“मैं मरने वालों में से नहीं हूँ। मैं मारने वालों में से हूँ।”
मायरा काँप गई।
रिया ने laptop को सीने से लगा लिया।
साहिल बोला,
“तुमने मेरे आदमी हराए… मेरे hideouts उड़ाए…
पर तुम एक बात भूल गए—
game को हमेशा mastermind ही जीतता है, hero नहीं।”
मैं गरजा,
“Truck से उतर। वरना मार दूँगा।”
वो बोला,
“No, Arav. अगर तुमने मुझे shoot किया… तो यह truck explosion में बदल जाएगा।”
मैं confused था।
“Truck में क्या है?”
वो बोला,
“20 kilo C4. Destination—HQ.”
मुझे समझ आ गया—
वो हमें HQ तक ले जाकर वहाँ blast करना चाहता था, ताकि data और proof दोनों खत्म हो जाएँ।
साहिल बोला,
“अब choice तुम्हारी—
अपनी जान बचाओ…
या देश।”
मैंने deep breath ली—
“दोनों बचेंगे।”
मैं truck की cabin की तरफ छलांग लगा दी।
पैसेज 48 – मौत से मुकाबला
मैं cabin में कूदा और साहिल के गर्दन पर पंच मारा।
Truck हिल गया।
साहिल ने steering पकड़ा और चिल्लाया,
“तुम truck रोक नहीं सकते! Built-in detonation है!”
हम गुत्थमगुत्था हो गए।
मैंने उसकी wrist पकड़कर उसे पीछे फेंका।
Truck zig-zag होने लगा।
मायरा चिल्लाई,
“ARAV! CAREFUL!”
रिया सीट पकड़कर लटकी हुई थी।
मेरा सिर्फ़ एक target था—
Truck की wire harness find करना।
मैंने dashboard तोड़ा—
नीचे explosives की wiring छुपी थी।
साहिल ने मेरा collar पकड़कर कहा,
“गलत wire काटोगे… boom!”
मैंने कहा,
“मैं अनुमान नहीं लगाता। मैं calculate करता हूँ।”
हम दोनों fight करते हुए driver seat से नीचे गिरे।
Truck…
एक बड़े पुल की तरफ बढ़ रहा था।
मैंने साहिल को जोरदार kick मारी—
उसका सिर window से टकराया।
मैंने quickly bomb wires analyze किए—
RED मतलब trigger।
BLUE मतलब backup circuit।
मैंने knife निकाली।
मायरा चीखी,
“Arav… कौन सी wire?”
मैंने कहा—
“Trust me.”
और मैंने RED wire काट दी।
पल भर की खामोशी—
Truck रुक गया।
Explosion नहीं हुआ।
हम जीत गए थे।
पैसेज 49 – अंतसूत्र
Truck रुका तो सभी शांत थे।
साहिल बेहोश पड़ा था।
रिया रो रही थी,
“हम सच में बच गए?”
मैंने उसे गले लगाया।
“हाँ। तुम दोनों safe हो।”
मायरा मेरे पास आई—
उसकी आँखों में नमी थी।
“तुमने आज अपनी जान… हमारी जान के लिए दांव पर लगा दी।”
मैंने मुस्कुराकर कहा,
“कभी-कभी जिंदगी सिर्फ़ इंसान के लिए नहीं… उसकी वजह के लिए भी लड़ी जाती है।”
राघव और पुलिस पहुँची।
साहिल गिरफ्तार हुआ।
डेटा intelligence wing को दे दिया गया।
दो ministers गिरफ्तार।
तीन बड़े businessmen expose हुए।
पूरा network ध्वस्त।
रिया hero बनी।
मायरा मेरे पास खड़ी थी—
चुप, पर आँखों में कुछ कहती हुई।
मैंने उससे कहा,
“अब सब खत्म हो गया है।”
वो मुस्कुराई,
“नहीं Arav… अब शुरू हुआ है।”
मैंने पूछा,
“क्या?”
वो धीरे से बोली,
“हमारा future।”
मैंने उसकी हथेली थाम ली।
और पहली बार…
ज़िंदगी, मौत, लड़ाई और जीत के बीच…
मुझे शांति मिली।
पैसेज 50 – अंतिम समापन
कुछ महीने बाद—
दिल्ली में सब शांत था।
Scam बंद, network खत्म, लोग safe।
मैं अपने ऑफिस में बैठा था—
चाय, फाइलें, और एक नई सूरज की रोशनी।
तभी दरवाज़ा खुला।
मायरा और रिया अंदर आईं।
रिया बोली,
“बहुत काम करते हो, सुपरहीरो। आराम भी कर लिया करो।”
मायरा मुस्कुराई,
“या फिर हमारे साथ कहीं घूम आया करो।”
मैंने कहा,
“Case है क्या?”
रिया बोली,
“Case नहीं… celebration का plan है।”
मैंने teasing tone में कहा,
“और party का bill कौन भरेगा?”
मायरा ने मेरी आँखों में देखकर कहा,
“तुम… क्योंकि असली जीत तुम्हारी थी।”
हम हँसे।
और फिर…
मायरा ने धीरे से कहा—
“Arav… जिंदगी में बहुत डर देखा है।
पर अब… शायद मैं किसी चीज़ से नहीं डरती।”
मैंने पूछा,
“क्यों?”
वो quietly बोली,
“क्योंकि… तुम मेरे साथ हो।”
मैंने उसका हाथ पकड़ा—
गर्म, मजबूत, भरोसे भरा।
और वहीं, Delhi की उस ठंडी हवा में…
एक crime-thriller कहानी का अंत नहीं,
बल्कि दो दिलों की शुरुआत हुई।
THE END